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Showing posts from April, 2020
~ मे री सैंतालीस साल की माँ, पिछले पाँच सालों में, जबसे मैंने घर छोड़ा है... शायद इन दिनों सबसे ज्यादा खुश रहती है। ये मैं नहीं, वो खुद कहती रहती हैं आजकल। उन्हें वो हर अच्छी बुरी चीज मुझे दिखानी होती हैं, जो वो इन पाँच सालों में मुझे याद कर कर के, खुद अकेली देखती रही। अकेली हंसती रही, कुठती रहीं। फिर फोन पे बताई बातों में वो स्वाद आ भी कहा पता हैं। हर पांच मिनट बाद उनका, "छोटी देख","छोटी देख" सुनाई दे देता है। चाहे वो सब्ज़ी के ठेले पर दिखा एक बहुत बड़ा तरबूज़ हो, या अलमारी साफ़ करते समय हमारे मिले पुराने कपड़े। लोग गलत ही कहते हैं कि दुल्हन के चेहरे की रौनक हसीन होती हैं। तुम कभी उस माँ का चेहरा देखो, जिसे अभी अभी पता चला हो कि उसकी सारी औलादें तीन महीनों तक सिर्फ़ उसके साथ रहेंगी। फिर से उसके प्राण पियेंगी। जो झूमती गाती, टूटे घुटनों से फुदकती, वो खिलखिला जाती हैं, मैं सोचती हूं कोई किसी से इतना प्यार कैसे कर सकता हैं।  मेरे घर के बाहर ये देहशती बीमारी हज़ारों लोगो को रोज़ाना चपेट में ले रहीं हैं, और घर के अंदर, इस आनंदित माहौल में, जाने कब ये रिवाज़ ब...